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बिहार सहयोग शिविर में जन शिकायतों पर सीएम सचिवालय की निगरानी, 30 दिन में समाधान अनिवार्य, लापरवाही पर होगी कार्रवाई

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बिहार सरकार 19 मई से शुरू होने वाले सहयोग शिविर में प्राप्त जन शिकायतों की सीएम सचिवालय स्तर पर निगरानी करेगी। 30 दिनों में समाधान अनिवार्य होगा, देरी या लापरवाही पर अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पटना/आलम की खबर:बिहार सरकार ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। 19 मई से शुरू होने वाले सहयोग शिविर को लेकर राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब इन शिविरों में आने वाली सभी जन शिकायतों की निगरानी सीधे मुख्यमंत्री सचिवालय स्तर पर की जाएगी। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी नागरिक की समस्या लंबित न रहे और समयबद्ध तरीके से उसका समाधान हो सके।

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की ओर से सभी वरीय अधिकारियों को जारी निर्देशों में कहा गया है कि सहयोग शिविर में प्राप्त होने वाली शिकायतों का केवल पंजीकरण ही नहीं, बल्कि उसका सतत अनुश्रवण भी किया जाएगा। इसके लिए एक वास्तविक समय निगरानी प्रणाली (Real Time Monitoring System) लागू की जा रही है, जिसे सहयोग पोर्टल से जोड़ा जाएगा। यह पोर्टल सीधे मुख्यमंत्री सचिवालय से संचालित होगा, जिससे हर शिकायत की स्थिति पर उच्च स्तर से नजर रखी जा सकेगी।

सरकार द्वारा बनाए गए इस नए सिस्टम में शिकायतों का वर्गीकरण, उनके निवारण की स्थिति, समाधान में देरी के कारण और संबंधित विभागों की भूमिका का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। यह विश्लेषण केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि किस स्तर पर लापरवाही या विलंब हो रहा है। यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता या उदासीनता पाई जाती है, तो संबंधित पदाधिकारी और कर्मियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

30 दिन में समाधान अनिवार्य, नहीं तो होगी कार्रवाई

नई व्यवस्था के तहत यह स्पष्ट कर दिया गया है कि सहयोग शिविर में आने वाली किसी भी जन शिकायत का समाधान अधिकतम 30 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा। यदि किसी कारणवश समस्या का समाधान निर्धारित समय में नहीं हो पाता है, तो संबंधित अधिकारी को इसकी लिखित जानकारी देनी होगी और अगली तिथि भी स्पष्ट रूप से बतानी होगी।

सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि किसी भी आवेदन को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाएगा। यदि किसी शिकायत के निपटारे में देरी होती है, तो उसके कारणों की समीक्षा उच्च स्तर पर की जाएगी और जिम्मेदारी तय की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करना और जनता के भरोसे को बढ़ाना है।

जिला स्तर पर भी बढ़ेगी जवाबदेही

मुख्य सचिव द्वारा जारी निर्देशों में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि सहयोग शिविर की अध्यक्षता जिला पदाधिकारी के अलावा किसी अन्य अधिकारी द्वारा की जाती है, तो शिविर समाप्त होने के बाद एक संक्षिप्त प्रतिवेदन जिला पदाधिकारी को अनिवार्य रूप से भेजा जाएगा।

इस प्रतिवेदन में उन अधिकारियों और कर्मियों की सूची भी शामिल होगी, जिनका प्रदर्शन संतोषजनक नहीं पाया गया है या जिन्होंने शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरती है। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

इस व्यवस्था से जिला स्तर पर भी प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही बढ़ेगी, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आने की उम्मीद है।

ग्राम पंचायत स्तर तक पहुंचेगा समाधान तंत्र

बिहार सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि अब ग्रामीण जनता की समस्याओं के समाधान के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर नियमित रूप से सहयोग शिविर लगाए जाएंगे। पहले से ही सप्ताह के दो कार्य दिवस—सोमवार और शुक्रवार—को जनसुनवाई कार्यक्रम चल रहे हैं, लेकिन अब इसे और विस्तारित किया गया है।

नई व्यवस्था के अनुसार, हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को प्रखंड और पंचायत स्तर पर सहयोग शिविर आयोजित किए जाएंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को अपनी शिकायतें सीधे प्रशासन के सामने रखने का अवसर मिलेगा और उन्हें जिला मुख्यालय तक जाने की आवश्यकता नहीं होगी।

आवेदन प्रक्रिया और पारदर्शिता पर जोर

सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि लोग अपनी शिकायतें शिविर से 30 दिन पहले से भी दर्ज करा सकेंगे। इससे प्रशासन को पहले से तैयारी करने और समस्याओं के समाधान की रणनीति बनाने में मदद मिलेगी।

इसके साथ ही पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है। प्रत्येक शिकायत की स्थिति पोर्टल पर अपडेट की जाएगी, जिससे आवेदक अपनी समस्या की प्रगति स्वयं देख सकेंगे। यह डिजिटल निगरानी व्यवस्था भ्रष्टाचार और देरी पर रोक लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

सरकार का उद्देश्य और प्रशासनिक सुधार

राज्य सरकार का मानना है कि सहयोग शिविर के माध्यम से जनता और प्रशासन के बीच की दूरी को कम किया जा सकता है। यह पहल न केवल शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करेगी, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली में भी सुधार लाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की वास्तविक समय निगरानी प्रणाली से सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आएगी और जवाबदेही तय करना आसान होगा। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार की पहुंच और प्रभावशीलता भी बढ़ेगी।

निष्कर्ष

बिहार में शुरू होने जा रहा सहयोग शिविर अब सिर्फ एक सामान्य जनसुनवाई कार्यक्रम नहीं रहेगा, बल्कि यह एक मजबूत डिजिटल और प्रशासनिक निगरानी प्रणाली के रूप में कार्य करेगा। सीएम सचिवालय स्तर पर निगरानी, 30 दिन की समयसीमा और लापरवाही पर कार्रवाई जैसे सख्त प्रावधान इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाते हैं। आने वाले समय में यह मॉडल राज्य में प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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